🕉 ध्यान शिविर प्रारंभ ऑनलाइन ध्यान कक्षाएँ — प्रतिदिन सुबह 4 बजे ऋषिकेश निशुल्क ध्यान शिविर ब्रह्ममुहूर्त साधना • WhatsApp 97798-02824 आनंद को धारण करोगे तो कृष्ण हो जाओगे शांति को धारण करोगे तो बुद्ध हो जाओगे 🕉 ध्यान शिविर प्रारंभ ऑनलाइन ध्यान कक्षाएँ — प्रतिदिन सुबह 4 बजे ऋषिकेश निशुल्क ध्यान शिविर ब्रह्ममुहूर्त साधना • WhatsApp 97798-02824 आनंद को धारण करोगे तो कृष्ण हो जाओगे शांति को धारण करोगे तो बुद्ध हो जाओगे
🌍 यह वेबसाइट आपकी भाषा में देखी जा सकती है — नीचे दिए Language Switcher से भाषा चुनें
📿 प्रतिदिन सुबह 4 बजे Online Zoom Meditation · सोमवार से शनिवार
ॐ क्रिया बाबाजी नमः

MEDITATION WITH
SPIRITUAL RAJYOGI

ब्रह्ममुहूर्त साधना • राजयोग • आत्मज्ञान

"जो स्वयं को जान लेता है, वह समस्त बंधनों से मुक्त होकर अपने वास्तविक स्वरूप में जागृत हो जाता है।"

📿 प्रतिदिन प्रातः 4 बजे Online Zoom Meditation

🟢 पंजीकरण करें 📚 राजयोगी ई-बुक 🤖 Rajyogi AI Assistant
Soham Meditation
✨ 7,350+ साधक • ध्यान साधना • आत्मज्ञान

|| ऊँ क्रिया बाबाजी नमः ऊँ || ऊँ तैलंग स्वामी तुभ्यं नमः ||

MEDITATION WITH SPIRITUAL RAJYOGI

Spiritual Meditation

मौन ही स्वयम से साक्षात्कार का एकमात्र मार्ग है,
जो गुरू कृपा से ध्यान अभ्यास में स्वतः ही घटित होता है

7,350+ साधक  •  ध्यान साधना  •  आत्मज्ञान

नीचे जाएँ
src="/images/rajyogi-photo.jpg" alt="राजयोगी जी" style="width:100%;height:100%;object-fit:cover;border-radius:50%;border:2px solid rgba(201,168,76,0.45);box-shadow:0 0 38px rgba(201,168,76,0.28);">
राजयोगी जी

राजयोगी जी के बारे में

मैं राजयोगी, एक साधक और ध्यान-मार्ग का अनुभवी पथिक हूँ। भारत के विभिन्न राज्यों में दीर्घकाल तक ध्यान शिविरों का संचालन किया है और हजारों साधकों को उनके परम-चेतन स्वरूप का परिचय करवाया है।

मेरी शिक्षाएँ किसी ग्रंथ की नकल नहीं — यह प्रत्यक्ष अनुभव की भाषा है। चेतना की स्थिरता, समाधि का मार्ग और आत्मज्ञान — इन्हें मैं आपके जीवन में उतारने का प्रयास करता हूँ।

Spiritual Rajyogi एक पूर्णतः-स्वतंत्र, अपनी-निजी-साधना-अनुभूति पर आधारित शिक्षा-परंपरा है। कृपया ध्यान दें — "राजयोगी" शब्द का प्रयोग अन्य आध्यात्मिक-परंपराओं/संस्थाओं द्वारा भी किया जाता है; Spiritual Rajyogi का ऐसी किसी भी अन्य संस्था, संगठन, या संप्रदाय से कोई संबंध, संबद्धता, या प्रतिनिधित्व नहीं है। यहाँ की समस्त शिक्षा राजयोगी जितेंद्र कुमार जी की अपनी प्रत्यक्ष, निजी साधना-अनुभूति से ही उत्पन्न है।

"स्थिर (ठहरी) हुई चेतना तो स्वयम में ही चेतन है — यह कर्म और इच्छाएं स्वप्न की तरह क्षणिक, नाशवान और आधार रहित हैं।"
📚

आध्यात्मिक डिजिटल पुस्तकालय

दिव्य ग्रन्थ संग्रह

राजयोगी जी की आत्मज्ञान एवं साधना-पथ की रचनाएँ

अन्य रचनाएँ
पुस्तक वाचन
— Meditation with Spiritual Rajyogi
Meditation with Spiritual Rajyogi 🙏
✦ Powered by AI ✦


Spiritual Rajyogi AI Assistant

आत्मज्ञान, ध्यान, समाधि, वेदान्त या किसी भी आध्यात्मिक विषय पर अपना प्रश्न पूछें — राजयोगी जी की शिक्षाओं पर आधारित एआई से तत्काल उत्तर पाएँ।

🪷

राजयोगी जी की शिक्षाओं पर आधारित हमारा AI Assistant सदा आपकी प्रतीक्षा कर रहा है — आत्मज्ञान, ध्यान, समाधि या जीवन की किसी भी उलझन पर अपना प्रश्न पूछें, और राजयोगी जी की वाणी में तत्काल, सहज मार्गदर्शन पाएँ।

AI Assistant से प्रश्न पूछें

🪷 24×7 उपलब्ध — बिल्कुल निःशुल्क

ध्यान के तीन स्तंभ

चेतना का ठहराव

इस बहते हुए जीवन और बहती हुई इच्छाओं में लिप्त चेतना का ठहराव अति आवश्यक है। बिना ठहरे पूर्ण मुक्ति और शांति मिलना संभव नहीं।

🕉

भाव और ईश्वर

जो ईश्वर पर अधिकार बनाते हैं, वही ईश्वर पर अधिकार जता सकते हैं। भाव ही ईश्वर के प्राण हैं, जिससे जीवित होकर ईश्वर कहीं भी और किसी भी स्वरूप में प्रगट हो जाते हैं।

समाधि का द्वार

शरीर को साधकर ऐसी स्थिरता में प्रवेश कीजिए कि यह शरीर पाषाण हो जाए, तब नारायण आपके भीतर विराट रूप में प्रगट होंगे और आप नारायण में संपूर्ण सृष्टि को लय होते एवम जन्म लेने का अद्भुत दृश्य देखोगे।

राजयोगी जी की अनुभव-वाणी

०१

परम उद्देश्य को पहचानें

ध्यान का अर्थ है — सभी क्रिया-कलापों से मुक्त होकर परमशांति, परमानंद और अखंड ठहराव में स्थित हो जाना। जब आप अपने परम उद्देश्य को जानेंगे, तभी ध्यान में प्रवेश होगा।

०२

श्वास और समाधि का रहस्य

जब श्वास-प्रश्वास की गति रुक जाती है, तब साधक के भीतर स्थित मन एवम् विचारों की सृष्टि भी ठहर जाती है — यहीं आत्मज्ञान के द्वार में प्रवेश है।

०३

त्रिबंध और नियति का सत्य

यह संसार त्रिबंध (प्रारब्ध, नियति और नियम) के आधार पर चलता है। केवल योगी — चेतना से युक्त साधक — इस त्रिबंध से मुक्त होता है।

०४

उदासीन भाव और ईश्वरत्व

ध्यान में प्रवेश करना है तो ईश्वर के उदासीन भाव को धारण करना होगा। जिस क्षण आप उदासीन भाव धारण कर विचार रूपी सृष्टि में हस्तक्षेप बंद कर देंगे — आप ईश्वर के दिव्य स्वरूप में प्रवेश कर जाएंगे।

"जो चेतना मूल से ही आनंद और सुख का स्वरूप है, उसका बाहर की ओर आनंद एवम सुख की खोज करना ही अज्ञानता है — जैसे कोई सम्राट चारपाई बिछाने जितनी जगह के लिए अपने ही राज्य में भीख मांग रहा हो।"

— राजयोगी जी

कक्षाएँ एवम् शिविर

🌙

Monday Night Batch

सोमवार रात्रि बैच

साप्ताहिक ध्यान सत्र — प्रत्येक सोमवार रात 8:30 बजे। आपकी स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत मार्गदर्शन।

Online • Zoom Meeting प्रत्येक सोमवार • रात्रि 8:30 सहयोग राशि: ₹1180/माह
🕯️

Special Night Batch

विशेष रात्रि ध्यान बैच (शाम का सत्र)

सोमवार और गुरूवार को विशेष रात्रि ध्यान सत्र — गहन साधना, मन की शांति और आत्मज्ञान की ओर एक और कदम।

Online • Zoom Meeting सोमवार और गुरूवार • रात्रि 8:30 से 9:10 सहयोग राशि: ₹2350/माह
💫

Personal Guidance

व्यक्तिगत मार्गदर्शन

ध्यान की किसी भी समस्या के लिए सीधे संपर्क करें। आपकी साधना की समस्याओं का व्यक्तिगत समाधान।

WhatsApp Only 97798-02824 Shrirajyogiji@gmail.com

अक्सर-पूछे-जाने-वाले प्रश्न FAQ

ब्रह्ममुहूर्त ध्यान क्या है? (What is Brahma Muhurta meditation?)

ब्रह्ममुहूर्त — सूर्योदय से लगभग-डेढ़-घंटे पहले का समय — राजयोग-ध्यान (Rajyoga meditation) अभ्यास के लिए विशेष-रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि इस समय प्रकृति सबसे-अधिक शांत व सकारात्मक होती है। Rajyogi Ji प्रतिदिन इसी ब्रह्ममुहूर्त में साधकों की कक्षा लेते हैं।

Morning meditation का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

Spiritual Rajyogi की शिक्षाओं के अनुसार, सुबह ब्रह्ममुहूर्त का समय morning meditation के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है — जब मन व वातावरण दोनों स्वाभाविक रूप से शांत होते हैं।

क्या Spiritual Rajyogi की कक्षाएँ ऑनलाइन उपलब्ध हैं?

हाँ, Rajyogi Ji की राजयोग-ध्यान (Rajyoga meditation) कक्षाएँ प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में ऑनलाइन आयोजित होती हैं। अधिक जानकारी के लिए ऊपर "कक्षाएँ एवं शिविर" अनुभाग देखें या WhatsApp पर संपर्क करें।

राजयोग ध्यान (Rajyoga meditation) किस प्रकार भिन्न है?

राजयोग ध्यान साक्षी-भाव और अहस्तक्षेप पर आधारित है — यह विचारों को दबाने की बजाय, विचारों से ऊपर उठकर अपने मूल-स्वरूप को पहचानने की स्वाभाविक प्रक्रिया सिखाता है।

"आप साधक तो इस क्षण को भी नहीं जी पा रहे हो!"

जो अभी वर्तमान में चल रहा है, जिसमें अभी आप इस समय में present हो, जीने वाले तो किसी भी भाव एवं धारणा को धारण कर समय में प्रवेश कर लेते हैं...

आप साधक तो इस क्षण को भी नहीं जी पा रहे हो! जो अभी वर्तमान में चल रहा है, जिसमें अभी आप इस समय में present हो, जीने वाले तो किसी भी भाव एवं धारणा को धारण कर समय में प्रवेश कर लेते हैं और उस बीते हुए भाव को भी जी लेते हैं। आपके भाव बिखरे हुए हैं, आपकी धारणा बिखरी हुई है, आप एक में एकाग्र नहीं हैं, इसलिए आप किसी भी स्वरूप को जी नहीं पाते हैं...

कभी इन संसारिक भावों से बने स्वरूपों का त्याग कर "अहं ब्रह्मास्मि" के भाव को धारण कर तो देखिए, आप निश्चित ही परम शांत एवं आनंद रूप परब्रह्म हो जाओगे।

आनंद को धारण करोगे तो कृष्ण हो जाओगे,
शांति को धारण करोगे तो बुद्ध हो जाओगे,
प्रकृति से ऐक्य का भाव धारण करोगे तो शिव हो जाओगे।

( क्रमशः... )

राजयोगी जी के विचार

किसी भी पंक्ति पर tap करें — हिंदी अनुवाद देखें

"There are no boundaries to living — you manifest and experience the exact state of consciousness you choose to hold."tap ↓
"जीने की कोई सीमा नहीं है — आप जिस चेतना की स्थिति को धारण करना चुनते हैं, वही प्रकट होती है और वही आप जीते हैं।"
"A stilled consciousness is inherently divine — worldly desires and actions are as fleeting and groundless as a passing dream."tap ↓
"स्थिर (ठहरी) हुई चेतना स्वाभाविक रूप से दिव्य है — सांसारिक इच्छाएं और कार्य उतने ही क्षणिक और निराधार हैं जितना कि कोई गुज़रता सपना।"
"Pure devotion is the very life-force that makes the Divine manifest — anywhere, in anyone."tap ↓
"शुद्ध भक्ति ही वह जीवन-शक्ति है जो परमात्मा को कहीं भी, किसी में भी प्रकट कर देती है।"
"Hold bliss — become Krishna. Hold stillness — become Buddha. Hold oneness with nature — become Shiva."tap ↓
"आनंद को धारण करोगे तो कृष्ण हो जाओगे, शांति को धारण करोगे तो बुद्ध हो जाओगे, प्रकृति से ऐक्य का भाव धारण करोगे तो शिव हो जाओगे।"
"Seeking joy outside is like an emperor fighting over a corner of his own kingdom — the treasure was always within."tap ↓
"बाहर आनंद खोजना ऐसा है जैसे कोई सम्राट अपने ही राज्य की एक कोठरी के लिए युद्ध कर रहा हो — खज़ाना सदा भीतर था।"
@Spiritualrajyogi  •  Meditation with Spiritual Rajyogi

चुनिंदा ध्यान प्रवचन

राजयोगी जी के YouTube चैनल से प्रमुख ध्यान-प्रवचन — क्लिक कर सुनें

Subscribe करें
ध्यान विधि
ध्यान विधि

द्रष्टा भाव क्या है और कैसे धारण करे | Sakshi bhav kya hai | Meditation with Spiritual Rajyogi

▶ अभी देखें@Spiritualrajyogi
समाधि
समाधि

Nirvikalpa samadhi kya hai aur kaise prapt karen I how to meditate-10 I Meditation with Spiritual Rajyogi

▶ अभी देखें@Spiritualrajyogi
ब्रह्ममुहूर्त
ब्रह्ममुहूर्त

Padmasana athva sidhasna lagane mein samasya aa rahi hai I asan ko kaise sidh karen- 4

▶ अभी देखें@Spiritualrajyogi
राजयोग
राजयोग

ध्यान साधना सीरीज- #1- आसन को कैसे सिद्ध करें | how to prove posture I Meditation with Spiritual Rajyogi

▶ अभी देखें@Spiritualrajyogi
मन की शांति
मन की शांति

आसन और शरीर को सिद्ध करने के लिए आवश्यक व्यायाम | Rishikesh meditation camp

▶ अभी देखें@Spiritualrajyogi

और वीडियो देखें
@spiritualrajyogi

और वीडियो

और आध्यात्मिक वीडियो देखें: राजयोग, ध्यान, समाधि | Meditation with Spiritual Rajyogi Channel

▶ चैनल देखें@Spiritualrajyogi

7,350+ साधक पहले से जुड़े हैं — आप भी चैनल Subscribe करें

MEDITATION • SAMADHI • RAJYOGA • BRAHMA MUHURTA

Subscribe करें सभी Videos देखें →

Meditation with Spiritual Rajyogi YouTube पर देखें ↗

साधना की राह पर आएँ

आप में से जिस भी साधक की ध्यान सीखने की इच्छा हो, वह साधक राजयोगी जी के सान्निध्य में online अथवा offline ध्यान सीखने के लिए आमंत्रित हैं।

WhatsApp97798-02824 (केवल WhatsApp)
EmailShrirajyogiji@gmail.com
YouTube@Spiritualrajyogi
Online ClassZoom Meeting • प्रातः 4:00 बजे
🙏 पंजीकरण / जानकारी

📱 WhatsApp खुलेगा — भेजें बटन दबाएँ

🌹 साधक अनुभव 🌹

उदाहरण अनुभव

यहाँ अनुमोदित साधकों के वास्तविक आध्यात्मिक अनुभव, ध्यान अनुभव एवं साधना से प्राप्त प्रेरणादायक अनुभूतियाँ प्रदर्शित की जाएँगी।

🌹 साधक अनुभव 🌹

🙏 Raju

Hello